राजस्थान: बागी पायलट खेमे की वापसी पर गहलोत कैम्प में नाराजगी, कई नेताओं ने उठाए सवाल
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राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे (Sachin Pilot Faction) के बीच गहरी हुई खाई को पाटने के बाद अभी भी इसमें दरार दिख रही है. वरिष्ठ नेताओं द्वारा करायी गई सियासी सुलह कई नेताओं को रास नहीं आ रही है.

जैसलमेर. अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) पर छाया संकट भले ही टल गया हो, लेकिन अंदरुनी तौर पर असंतोष की आग अभी भी सुलग रही है. करीब एक महीने तक सरकार की सांसों के अटकाये रखने वाले बागियों की वापसी से गहलोत खेमे के कई विधायक और नेता खुश नहीं हैं. वे पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट (Sachin Pilot) समेत उनके समर्थक पार्टी के अन्य बागी विधायकों की वापसी पर स्वागत की जगह सवाल उठा रहे हैं. अब ऐसे विधायकों और नेताओं को संतुष्ट करना पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए एक नई मुसिबत है.
वरिष्ठ नेताओं ने कराया शांत
दरअसल, दिल्ली में राहुल और प्रियंका गांधी की मध्यस्थता से जिस तरह से बागी सचिन पायलट और उनके समर्थक कांग्रेस के विधायकों की पार्टी में वापसी हुई है, वह गहलोत खेमे के कई विधायकों तथा नेताओं को रास नहीं आ रही है. बागी खेमे की वापसी के बाद मंगलवार रात को जैसलमेर में होटल सूर्यगढ़ में आयोजित विधायक दल की बैठक में इसको लेकर विरोध के कई स्वर उठे. बैठक शुरू होते ही कई विधायकों ने बागियों की घर वापसी पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की. इन विधायकों ने बैठक में अपने कड़े तेवर भी दिखाये. विधायकों के तेवर देखकर बाद में वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शांत करवाया. इसके साथ ही इन नेताओं ने विधायकों को अनावश्यक बयानबाजी से बचने की सलाह भी दी.
दरअसल, दिल्ली में राहुल और प्रियंका गांधी की मध्यस्थता से जिस तरह से बागी सचिन पायलट और उनके समर्थक कांग्रेस के विधायकों की पार्टी में वापसी हुई है, वह गहलोत खेमे के कई विधायकों तथा नेताओं को रास नहीं आ रही है. बागी खेमे की वापसी के बाद मंगलवार रात को जैसलमेर में होटल सूर्यगढ़ में आयोजित विधायक दल की बैठक में इसको लेकर विरोध के कई स्वर उठे. बैठक शुरू होते ही कई विधायकों ने बागियों की घर वापसी पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की. इन विधायकों ने बैठक में अपने कड़े तेवर भी दिखाये. विधायकों के तेवर देखकर बाद में वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शांत करवाया. इसके साथ ही इन नेताओं ने विधायकों को अनावश्यक बयानबाजी से बचने की सलाह भी दी.
खटक रही है बागियों की वापसी
उल्लेखनीय है कि सुलह से पहली रात को जैसलमेर में हुई विधायक दल की बैठक में कई नेताओं ने बागियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी. इस बैठक के बाद लगभग यह तय हो गया था कि बागियों के लिये अब पार्टी के दरवाजे बंद हो चुके हैं. लेकिन CWC के सदस्य रघुवीर मीणा ने अपने बयान से सुलह के संकेत दिये थे. उसके बाद अगले दिन दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत अन्य नेताओं ने पायलट से बातचीत कर सुलह की राह खोली और उनकी पार्टी में वापसी कराई थी. लेकिन, यह वापसी गहलोत खेमे के कई विधायकों और नेताओं को खटक रही है.
उल्लेखनीय है कि सुलह से पहली रात को जैसलमेर में हुई विधायक दल की बैठक में कई नेताओं ने बागियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी. इस बैठक के बाद लगभग यह तय हो गया था कि बागियों के लिये अब पार्टी के दरवाजे बंद हो चुके हैं. लेकिन CWC के सदस्य रघुवीर मीणा ने अपने बयान से सुलह के संकेत दिये थे. उसके बाद अगले दिन दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत अन्य नेताओं ने पायलट से बातचीत कर सुलह की राह खोली और उनकी पार्टी में वापसी कराई थी. लेकिन, यह वापसी गहलोत खेमे के कई विधायकों और नेताओं को खटक रही है.
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